उत्तर प्रदेश के बरेली समेत कई जिलों में चल रहे एलपीजी संकट के बीच अब गैस उपभोक्ताओं के लिए एक नया नियम लागू कर दिया गया है, जिसने आम लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा शुरू की गई नई प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपने तय वार्षिक कोटे से अधिक गैस सिलेंडर लेना चाहता है, तो उसे अब इसका स्पष्ट कारण बताना अनिवार्य होगा।
दरअसल, देशभर में एलपीजी सिलेंडरों की कमी और बढ़ती मांग के चलते यह कदम उठाया गया है। पहले जहां उपभोक्ता आसानी से सिलेंडर बुक कर लेते थे, वहीं अब उन्हें अतिरिक्त सिलेंडर लेने के लिए कई सवालों के जवाब देने होंगे। इस प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम यानी मोबाइल एप के जरिए लागू किया गया है, जिससे सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
नई व्यवस्था के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं ने अपने सालाना 12 सिलेंडर का कोटा पूरा कर लिया है, उन्हें अतिरिक्त सिलेंडर बुक करने के लिए “Hello BPCL” ऐप का उपयोग करना होगा। इस ऐप पर उन्हें अपनी आवश्यकता से जुड़ी जानकारी देनी होगी, जैसे कि घर में कितने सदस्य हैं, क्या घर में कोई शादी या बड़ा कार्यक्रम है, कितने मेहमान आने वाले हैं या फिर किसी विशेष घरेलू उपयोग के लिए गैस की जरूरत है। इन सभी सवालों के जवाब देने के बाद ही बुकिंग प्रक्रिया पूरी होगी और सिलेंडर जारी किया जाएगा।
हालांकि, इस नए नियम के लागू होते ही लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और उन लोगों के लिए यह व्यवस्था मुश्किल बन गई है जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते या डिजिटल प्लेटफॉर्म से परिचित नहीं हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अब गैस एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, जिससे उनकी दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
इस पूरे मामले को अगर व्यापक नजरिए से देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि एलपीजी की कमी केवल सप्लाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। हाल ही में बरेली और आसपास के इलाकों में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के मामले भी सामने आए हैं, जहां उपभोक्ताओं को मजबूरी में अधिक कीमत पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, प्रशासन ने जमाखोरी पर भी सख्ती दिखाते हुए यह साफ कर दिया है कि यदि किसी घर में दो से अधिक घरेलू सिलेंडर पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से गैस उपलब्ध हो सके और कोई भी व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा न करे।
इन सभी बदलावों के बीच आम उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। एक तरफ उसे गैस की उपलब्धता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ नए नियमों और डिजिटल प्रक्रियाओं को समझना भी उसके लिए चुनौती बन गया है। खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।
अंत में कहा जा सकता है कि सरकार और तेल कंपनियों द्वारा उठाए गए ये कदम भले ही सिस्टम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किए गए हों, लेकिन इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि इन नियमों को लागू करते समय उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी डिजिटल पहुंच को भी ध्यान में रखा जाए, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।