Hantavirus: चूहों से फैलने वाला खतरनाक वायरस, WHO ने क्यों जारी की चेतावनी?”
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों को लेकर लोगों की जागरूकता काफी बढ़ी है। COVID-19 महामारी के बाद जब भी किसी नए वायरस या बीमारी की खबर सामने आती है, लोग तुरंत सतर्क हो जाते हैं। ऐसा ही एक वायरस है हंटावायरस, जिसके बारे में हाल के समय में फिर से चर्चा बढ़ी है। हालांकि यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन आज भी बहुत से लोग इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं जानते।World Health Organization (WHO) के अनुसार हंटावायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतक जीवों के माध्यम से फैलता है। यह वायरस इंसानों के फेफड़ों या किडनी को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी वजह से WHO और दुनिया की दूसरी स्वास्थ्य एजेंसियां इस बीमारी पर लगातार नजर रखती हैं।इस लेख में हम WHO की रिपोर्ट और सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी के आधार पर आसान भाषा में समझेंगे कि हंटावायरस क्या है, यह कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
हंटावायरस क्या है?
हंटावायरस कई प्रकार के वायरस का एक समूह है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतक जीवों में पाया जाता है। ये जानवर आमतौर पर खुद बीमार नहीं पड़ते, लेकिन इनके मूत्र, लार और मल के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकते हैं।WHO के अनुसार इंसान इस वायरस के प्राकृतिक वाहक नहीं होते बल्कि गलती से संक्रमित हो जाते हैं। जब संक्रमित चूहों के मल या मूत्र के सूखे कण हवा में मिल जाते हैं और कोई व्यक्ति उन्हें सांस के जरिए अंदर ले लेता है, तब संक्रमण फैल सकता है।दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में हंटावायरस के अलग प्रकार पाए जाते हैं। कुछ प्रकार फेफड़ों को प्रभावित करते हैं जबकि कुछ किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज की स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ सकती है।
WHO के अनुसार हंटावायरस के प्रकार
WHO की रिपोर्ट के अनुसार हंटावायरस संक्रमण मुख्य रूप से दो प्रकार की गंभीर बीमारियों से जुड़ा हुआ है।पहला प्रकार है Hantavirus Pulmonary Syndrome (HPS)। यह बीमारी मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका में पाई जाती है और फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। मरीज को अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगती है और कई बार स्थिति respiratory failure तक पहुंच सकती है।दूसरा प्रकार है Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS)। यह बीमारी यूरोप और एशिया में ज्यादा देखी जाती है और मुख्य रूप से किडनी को प्रभावित करती है। इसमें bleeding disorders, low blood pressure और kidney failure जैसी समस्याएं हो सकती हैं।WHO का कहना है कि दोनों ही स्थितियां समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकती हैं।
हंटावायरस कैसे फैलता है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि हंटावायरस भी COVID-19 की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है, लेकिन WHO की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता।यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और उनके आसपास के वातावरण से फैलता है।WHO के अनुसार संक्रमण तब होता है जब कोई व्यक्ति ऐसे स्थानों में सांस लेता है जहां संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार मौजूद हो। पुराने बंद कमरे, गोदाम, खेत, स्टोर रूम, खलिहान या ऐसी जगहें जहां लंबे समय से सफाई नहीं हुई हो, वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।यदि कोई व्यक्ति संक्रमित सतह को छूकर अपने मुंह, आंख या नाक को छू ले, तब भी संक्रमण हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में चूहे के काटने से भी वायरस फैल सकता है।WHO ने यह भी बताया है कि Andes virus नामक हंटावायरस का एक प्रकार सीमित रूप से व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने की क्षमता रखता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम हैं।
हंटावायरस के शुरुआती लक्षण
WHO के अनुसार हंटावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं, इसलिए शुरुआत में बीमारी को पहचानना मुश्किल हो सकता है।मरीज को बुखार, थकान, शरीर दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। कुछ लोगों को उल्टी, मतली और पेट दर्द की शिकायत भी हो सकती है।क्योंकि ये लक्षण फ्लू जैसे सामान्य संक्रमणों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन कुछ दिनों बाद बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।
गंभीर लक्षण और खतरे
WHO की रिपोर्ट के अनुसार सबसे खतरनाक स्थिति तब शुरू होती है जब वायरस फेफड़ों को प्रभावित करना शुरू कर देता है।मरीज को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, तेजी से सांस चलना और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में मरीज के फेफड़ों में पानी भर सकता है और उसे ICU में भर्ती करना पड़ सकता है।यदि वायरस किडनी को प्रभावित करे, तो kidney failure, bleeding problems और low blood pressure जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।WHO के अनुसार गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।
WHO के अनुसार मृत्यु दर
WHO की रिपोर्ट बताती है कि हंटावायरस की मृत्यु दर वायरस के प्रकार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।यूरोप और एशिया में पाए जाने वाले कुछ प्रकारों में मृत्यु दर 15 प्रतिशत से कम रहती है, जबकि अमेरिका में पाए जाने वाले कुछ गंभीर प्रकारों में यह दर 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।इसी वजह से WHO इस बीमारी को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में देखता है।
हंटावायरस की पहचान कैसे होती है?
WHO के अनुसार डॉक्टर मरीज के लक्षण, उसके आसपास के वातावरण और laboratory tests के आधार पर बीमारी की पहचान करते हैं।यदि मरीज हाल ही में ऐसे स्थानों पर गया हो जहां चूहों की मौजूदगी हो, तो डॉक्टर हंटावायरस की संभावना पर विचार करते हैं।संक्रमण की पुष्टि के लिए antibody tests और PCR tests किए जा सकते हैं। फेफड़ों की स्थिति देखने के लिए chest X-ray और CT scan का भी उपयोग किया जाता है।WHO के अनुसार शुरुआती पहचान मरीज की जान बचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
क्या हंटावायरस का इलाज है?
WHO के अनुसार फिलहाल अधिकांश हंटावायरस संक्रमणों के लिए कोई विशेष approved cure या vaccine उपलब्ध नहीं है।इलाज मुख्य रूप से मरीज को supportive medical care देने पर आधारित होता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल या ICU में भर्ती किया जाता है जहां डॉक्टर उनकी सांस, ऑक्सीजन लेवल और शरीर के दूसरे अंगों की निगरानी करते हैं।यदि मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो, तो oxygen therapy या ventilator support की जरूरत पड़ सकती है। किडनी फेल होने की स्थिति में dialysis भी करनी पड़ सकती है।WHO का कहना है कि जल्दी इलाज मिलने से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
WHO के अनुसार बचाव कैसे करें?
WHO हंटावायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई और rodent control को सबसे महत्वपूर्ण मानता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर, गोदाम, खेत और स्टोर रूम को साफ रखें और चूहों को अंदर आने से रोकें। खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित तरीके से बंद करके रखना चाहिए।WHO विशेष रूप से चेतावनी देता है कि चूहों के सूखे मल को सीधे झाड़ू से साफ नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे वायरस हवा में फैल सकता है। सफाई से पहले उस जगह पर disinfectant spray करना चाहिए और gloves तथा mask पहनना चाहिए।
WHO द्वारा हाल के मामलों की निगरानी
WHO दुनिया भर में हंटावायरस के मामलों की लगातार निगरानी करता है। हाल की रिपोर्टों में cruise ship से जुड़े कुछ मामलों की जानकारी सामने आई थी, जिनमें Andes virus strain पाया गया था।WHO ने स्पष्ट किया कि हालांकि इन मामलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की गई, लेकिन आम जनता के लिए खतरा कम माना गया क्योंकि यह वायरस COVID-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता।
जागरूकता क्यों जरूरी है?
हालांकि हंटावायरस एक दुर्लभ बीमारी है, लेकिन WHO का मानना है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता होना बेहद जरूरी है।यह संक्रमण अक्सर गांवों, खेतों, पुराने मकानों, गोदामों और ऐसी जगहों पर शुरू होता है जहां लोग खतरे को गंभीरता से नहीं लेते। शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होने के कारण बीमारी की पहचान देर से हो सकती है।सही जानकारी और साफ-सफाई की आदतें संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
निष्कर्ष
WHO की रिपोर्ट के अनुसार हंटावायरस एक गंभीर rodent-borne viral disease है जो इंसानों के फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि यह बीमारी बहुत आम नहीं है, लेकिन गंभीर मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकती है।WHO लगातार rodent control, साफ-सफाई, safe cleaning practices, शुरुआती diagnosis और तेज medical response पर जोर देता है ताकि संक्रमण को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।आज के समय में हंटावायरस जैसी बीमारियां हमें यह याद दिलाती हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण हैं।